एशियन हैड नेक कैंसर संस्था द्वारा निशुल्क ओरल कैंसर सर्जरी की गयी

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एशियन हेड नैक कैंसर संस्था द्वारा निशुल्क ओरल कैंसर सर्जरी की गयी

मुँह का कैंसर दुनिया में सबसे अधिक प्रचलित खतरनाक बीमारियों में से एक है। देश में ओरल , सर्वाइ कल और ब्रेस्ट कैंसर के मामलो में से ओरल कैंसर में तेजी से वृद्धि हुई है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल -2019 की रिपोर्ट की मुताबिक एनसीडी क्लीनिक ने 2017 से 2019 के बीच कैंसर के मामलो की पहचान की है। आंकड़ों पर गौर करे तो इस एक साल के अंतराल में देश में कैंसर के मामले तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गए है।
भारत में वर्ष 2020 तक पुरुषों के बीच कैंसर के अनुमानित आकड़ो से पता चलता है कि कैंसर के मामलों की संख्या में से मुंह (99,495) और जीभ (60,669) के कैंसर की संख्या पायी गई है । यह मुंह का कैंसर भारत के अधिकतम पुरुषों के लिए अग्रणी कैंसर बनता है।
तंबाकू और अल्कोहल के उपयोग में वृद्धि सामाजिक रूप से स्वीकार्य परंपरा है।अल्कोहल के व्यापक उपयोग ने लम्बे समय के उपयोगकर्ताओं में ओरल कैंसर के विकास के संबंध में चिंता पैदा की है।मुंह के कैंसर के कारण भारत में हर दिन पांच लोगों की मौत हो जाती है सच्ची घटना और मृत्यु दर अधिक हो सकती है

राजस्थान में देश के कैंसर के बोझ का 5.67% हिस्सा है, जो स्वास्थ्य अधिकारियों और राज्य के लोगों के लिए गंभीर चिंता का कारण है।ओरल कैंसर पश्चिम क्षेत्र (24.69%) और मध्य क्षेत्र (31.82%) में सबसे अधिक प्रचलित है। राजस्थान में अधिकतम मुँह और गले के कैंसर में 4th स्टेज में निदान होता है.
यह अनुमान लगाया गया है कि मुंह के कैंसर के लगभग 50% रोगी लक्षणों से अवगत होने के 1-2 महीने के बाद स्वास्थ्य देखभाल संस्था की पहली बार मुलाकात करते हैं, जबकि लगभग 20-30% मरीज तीन महीने से अधिक समय के बाद मदद मांगते हैं।
जिनमें से एक फाइनेंसियल बाधा है; इसके अलावा, रोगियों को उनके लक्षणों की प्रासंगिकता की उचित व्याख्या करने के लिए अपर्याप्त या गलत ज्ञान हो सकता है या कैंसर के डर या चिकित्सा उपचार में विश्वास की कमी के कारण मदद लेने में विफल हो सकता है।पिछले कुछ दशकों में महिलाओं और युवा वयस्कों में कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है। युवा और महिलाएं सहकर्मी के दबाव के कारण या तो अपने संतोष के लिए धूम्रपान या धूम्रपान रहित तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं।ओरल कैंसर के पेशेंट स्वास्थय संस्था और स्वास्थय केन्द्रो की कमी के कारन आवयशक मदद नहीं ले पाते। जिनके कारन कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच जाता है।

क्या है E -CAN क्लिनिक-

मुँह के कैंसर का जल्द ही पता लगाना दन्त चिकित्स्क का स्वास्थ्यकर्मियो का शशक्तिकरण
हेल्थ सेवाये प्रोजेक्ट एसियन हेड नैक कैंसर संसथान द्वारा की गई शरुआत है. इस प्रोग्राम के तहत हमारे जुड़े स्वास्थ्य कर्मी से कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपनी मुँह और गले के कैंसर की जांच निशुल्क करा सकते है. हर महीने डॉक्टर्स / डेंटिस्ट के साथ मिलकर संस्थान के साथ उनके कार्य क्षेत्र में निशुल्क परामर्श कैंप का भी आयोजन होता है. अभी तक हमने 150 निशुल्क मुँह और कैंसर के जाँच परामर्श कैंप का आयोजन कर चुके है।

सिरोही में पहली बार की गयी ओरल कैंसर सर्जरी का दिलचस्प मामला

सिरोही के स्थायी गांव वीरवाड़ा , जिला सिरोही पेशेंट नाम थानाराम को एशियन हेड नेक कैंसर संस्था के क्लिनिक वाची डेंटल & मेडिकल क्लिनिक , डॉ. हिमांशु वर्मा और डॉ. भार्गव गुप्ता (ओरल & मैक्सिलोफासिअल सर्जन ) द्वारा कैंसर का डायग्नोज़ किया गया था। पेशेंट की जाँच करने के बाद पेशेंट को जड़बे की कैंसर की बीमारी पायी गयी।
मरीज की उम्र को देखते हुए डॉ. शक्ति सिंह देवड़ा के नेतृत्व में सर्जिकल टीम के साथ मिलकर एडवांस प्लास्टिक सर्जरी की जिसमे जड़बे का पुनर्निर्माण पैर की हड्डी ब्लड वेस्ल्स के साथ लेकर की गई। यह सर्जरी सर्जिकल टिम , डॉ. शक्ति सिंह देवड़ा (हेड & नैक कैंसर & माइक्रो वैस्कुलर रेकंसट्रक्टिव सर्जन), डॉ. भार्गव गुप्ता (ओरल & मैक्सिलोफासिअल सर्जन ) डॉ. सुदीप श्रीवास्तव (फेलो इन हेड नैक ओंको सर्जन ) डॉ. गौरव सिमलोत (डेंटल सर्जन ) और अनेस्थेसिआ टीम डॉ. हर्षा भाटिया और डॉ. रेनू मेडम द्वारा की गयी जो 10 घंटे लम्बी चली और पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल भगवान महावीर हॉस्पिटल की अनुभवी टीम द्वारा की गयी।

जबड़े के पुनर्निर्माण का अधिकांश हिस्सा छाती के सॉफ्ट टिश्यू द्वारा किया जाता है जो बाद मे ओौक्लुसन को विचलित करता है और कंधे में दर्द का कारण बनता है, दंत पुननिर्माण भी नहीं किया जा सकता है जो रोगी के जीवन की गुणवत्ता से समझौता करता है .. लेकिन यह ध्यान में रखते हुए अद्वितीय प्लास्टिक सर्जरी की गयी है।
ये प्लास्टिक सर्जरी यदि निजी अस्पताल में की जाती इसका शुल्क तक़रीबन 5 लाख रूपए तक हो शकता था पर एशियन हेड नेक कैंसर संस्था एवम भगवान महावीर हॉस्पिटल की मदद से यह सर्जरी निशुल्क रूप से की गयी

ऐसिअन हेड नैक कैंसर संस्था की भूमिका

ऐसिअन हेड नैक कैंसर संस्था 2017 में एनजीओ रजिस्टर्ड है। ऐसिअन हेड नैक कैंसर संस्था तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों और कैंसर के प्रारंभिक पता लगाने और उपचार के लिए मार्गदर्शन के बारे में व्यापक जागरूकता के लिए काम कर रहा है। हम सकिर्य रूप से जोधपुर , सिरोही , जालोर व् पाली (राजस्थान ) और गुजरात में 3 वर्षो से अधिक समय से काम कर रहे है।
हम नए उपचारों को आगे बढ़ाने के लिए ओरल, हेड और नेक कैंसर के शुरुआती पता लगाने और उपचार में सहायक अनुसंधान और शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, और उन रोगियों के दुख और कार्यात्मक हानि को कम करते हैं जो उपचार से गुजरते हैं।
फाउंडेशन की मुख्य लक्ष्य बीमारी से राहत और आम जनता और संबंधित लोगों के बीच प्रासंगिक जानकारी के प्रसार के द्वारा मुंह, गले और अन्य सिर और गर्दन के कैंसर के जोखिम के बीच अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और संरक्षण है।